रोज सुबह ध्यान करने के फायदे क्या हैं? (मन को साधने का सरल, सुरीला मार्ग)
ज़रा ठहरिये... इस भागती हुई दुनिया में, एक पल रुकिए तो सही। क्या आपके अंदर भी एक तलाश है? एक सुकून की, एक ठहराव की? जहाँ मन की अनंत लहरें थोड़ी थम जाएं, जहाँ बाहर का शोर भीतर तक न पहुंचे?
हाँ, हम सब कहीं न कहीं उसी शांति की खोज में हैं। और मज़े की बात ये है, कि ये खज़ाना कहीं दूर नहीं, आपके अपने ही भीतर मौजूद है। हज़ारों साल पहले, हमारे ज्ञानी पूर्वजों ने, वेदों और गीता जैसे ग्रंथों में, इसी भीतर के रास्ते का नक्शा खींचा था। उन्होंने बताया कि ये जो हमारा मन है न, ये बड़ा अलबेला साथी है। अगर इसे साधना सीख लो, तो ये कल्पवृक्ष बन जाए, और अगर यूँ ही छोड़ दो, तो कांटों भरा जंगल।
तो आइए, आज सुनें और समझें कि रोज सुबह ध्यान करने के फायदे क्या हैं? ये सिर्फ फायदे नहीं, ये वो अनुभव हैं जो आपके जीवन में संगीत की तरह घुल जाते हैं, जब आप रोज़ सुबह कुछ पल ख़ुद के साथ, ख़ामोशी में बिताते हैं।
ध्यान की लय में जीवन के बदलते सुर:
जब आप रोज़ सुबह, भोर की पहली किरण के साथ, चुपचाप बैठ जाते हैं... तो देखिये क्या होता है:
① मन की बहती नदी, शांत सरोवर बन जाती है: विचारों की नदियाँ तो बहती रहेंगी, उन्हें रोकना मुश्किल है, नामुमकिन है। पर ध्यान आपको सिखाता है कि कैसे आप उस नदी के किनारे, एक शांत द्रष्टा बन जाएं। आप देखते हैं, विचार आ रहे हैं, जा रहे हैं... पर आप उनमें बहते नहीं। धीरे-धीरे, वो नदी खुद ही शांत होने लगती है, जैसे बारिश के बाद तालाब का पानी निर्मल हो जाता है। इसी निर्मलता में असली सुकून छिपा है।
② धुंध छंटती है, राह साफ़ नज़र आती है: जब भीतर शोर कम होता है, तो समझ की आँख खुलती है। क्या सही है, क्या गलत, क्या ज़रूरी है, क्या फिजूल – ये सब आईने की तरह साफ़ दिखने लगता है। जैसे सूरज निकलने पर रास्ता दिखने लगता है, वैसे ही ध्यान की रोशनी में जीवन की राह स्पष्ट हो जाती है। फैसले लेना बोझ नहीं, एक सहज चुनाव बन जाता है।
③ भावनाओं के झूले पर, आप स्थिर बने रहते हैं: सुख-दुःख, खुशी-गम, ये तो जीवन के मौसम हैं, आते-जाते रहेंगे। ध्यान आपको सिखाता है कि इन मौसमों के बीच भी, आप अपने केंद्र में स्थिर रहें। आप खुशी में बहकते नहीं, दुःख में डूबते नहीं। आप हर भावना को महसूस करते हैं, पर उसके असर से मुक्त रहते हैं, जैसे कमल कीचड़ में रहकर भी उससे अछूता रहता है। यही सच्ची स्थिरता है।
④ ‘मैं’ की खोज में, खुद से मुलाक़ात होती है: हम कौन हैं? बस ये नाम, ये मन, ये शरीर, ये रिश्ते? या कुछ और भी? ध्यान आपको इस गहरी खोज पर ले जाता है। जब आप शांति से बैठते हैं, तो बाहरी पहचानें धीरे-धीरे धुंधली होती हैं और आप अपने असली स्वरूप के करीब आते हैं। आपको अपनी गहरी चाहतें, अपने अनजाने डर, सब दिखने लगते हैं। ये खुद से दोस्ती करने का सबसे खूबसूरत तरीका है।
⑤ हर पल एक नया गीत बन जाता है (वर्तमान में जीना): मन या तो बीते कल के राग अलापता है, या आने वाले कल के सपने बुनता है। ‘आज’, ‘अभी’, इस पल में वो टिकता ही नहीं। ध्यान आपकी चेतना को खींचकर, प्यार से, इसी पल में ले आता है। आपकी सांस, जो हर पल आपके साथ है, वही आपका सुर बन जाती है। और जब आप इस पल में होते हैं, तो जीवन का हर काम, हर अनुभव, एक नए गीत की तरह मधुर लगने लगता है।
वो 5 मिनट का अभ्यास, जो जीवन का संगीत बदल दे:
ज्ञान की बातें बहुत हुईं, अब उस सरल साधना को जानें जो इन अनुभवों का द्वार खोलती है:
- बैठें सहज: भोर के शांत पहर में, आराम से बैठ जाएं। तन सीधा, पर अकड़ा हुआ नहीं। जैसे कोई फूल सहजता से खिला हो।
- पलकें झुकाएं: धीरे से आँखें मूंद लें, जैसे दुनिया से नज़र हटाकर, अपने भीतर देख रहे हों।
- सांस की सरगम सुनें: बस अपनी आती-जाती सांस को महसूस करें। कोई ज़ोर नहीं, कोई कोशिश नहीं। जैसी है, वैसी ही। हवा अंदर... हवा बाहर... जीवन का यही सहज संगीत है।
- मन की शरारत देखें: मन तो बच्चा है, दौड़ेगा, भागेगा। पुराने खेल खेलेगा, नए सपने देखेगा। यही वो पल है जहाँ साधना काम आती है! जब भी लगे कि मन कहीं और निकल गया, तो उसे डांटें नहीं। बस एक प्यारी सी मुस्कान के साथ, हौले से, उसका हाथ पकड़कर वापस सांस की सरगम पर ले आएं। हज़ार बार जाए, हज़ार बार ले आएं। यही है प्रेम भरा अनुशासन।
- अभ्यास पूरा, शांति का अनुभव: 5 मिनट बाद, जब समय पूरा हो, धीरे से आँखें खोलें। कुछ पल बस यूँ ही बैठें। महसूस करें उस गहरी शांति को, जो आपके भीतर फैल रही है।
यह लय काम क्यों करती है?
क्योंकि यह प्रकृति का नियम है। यह आपके मन और शरीर का विज्ञान है। यह हज़ारों वर्षों का संचित अनुभव है जो कहता है:—
- जब आप शांत होते हैं, आप ज़्यादा जागरूक होते हैं।
- जब आप जागरूक होते हैं, आप सही दिशा चुन पाते हैं।
- जब आप वर्तमान में होते हैं, आप जीवन को पूरी तरह जीते हैं।
अनुभव ही सच्चा गुरु है:
ये शब्द, ये लय, आपको रास्ता दिखा सकते हैं। पर चलना तो आपको ही होगा। कल सुबह, जब दुनिया जाग रही हो, आप ये 5 मिनट अपने भीतर जागने के लिए निकालिए। इसे नियम की तरह नहीं, एक प्रेम भेंट की तरह खुद को दीजिए।
ज्ञान अपनी जगह है, पर अनुभव का स्वाद ही अलग है। चखकर देखिये, शायद आपके जीवन का संगीत ही बदल जाए!
मेरी दिल से सच्ची कामना है कि सभी गुरुओं का आशीर्वाद आपके साथ हो 🙏